अमृता प्रीतम जी एक पंजाबी कवयित्री की कहानी- amrita pritam ji ek punjabi kavyitri ki kahani

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अमृता प्रीतम पहली पंजाबी कवयित्री

नमस्कार मित्रों आज के इस article में हम पहली पंजाबी कवयित्री अमृता प्रीतम जी के बारे में बताने जा रहे हैं.

पंजाबी कवियों में अमृता प्रीतम जी सबसे पहली पंजाबी कवयित्री और लोकप्रिय लेखकों में से एक रही हैं. इनका जन्म भारत के पंजाब राज्य के गुजरांवाला जिले में हुई थी.इन्होंने अपने जीवन मे 100 पुस्तकें लिखी है. इन 100 पुस्तकों में उनकी स्वयं की चर्चित आत्मकथा रसीदी टिकट भी शामिल हैं.अमृता प्रीतम जी के द्वारा लिखी गई कृतियों को अलग-अलग भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है.अमृता प्रीतम जी को उनके जीवन के अंतिम दिनों में देश का सबसे बड़ा सम्मान पद्मविभूषण से सम्मान किया गया. अमृता प्रीतम जी को इससे पहले ही साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था.

अमृता प्रीतम जी का बचपन लाहौर में बिता औऱ उनकी शिक्षा भी लाहौर में हुई. उन्होंने किशोरावस्था में ही कविता लिखना शुरू कर दी थी अमृता जी कविता,कहानी,निबंध को लिखनी शुरू की थी. उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं को देशी विदेशी भाषाओं में अनुदित किया गया है, उन्हें 1957 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला, 1958 में पंजाब की राज्य सरकार के भाषा विभाग से सम्मानित हुई.इसके बाद उन्हें 1982 में देश का सबसे सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया , साल 1988 में अंतरराष्ट्रीय बल्गारिया वैरोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया.अमृता जी की एक प्रसिद्ध कविता “आज आखां वारिस शाह नु” के लिए वह एक प्रसिद्ध कवियत्री रहीं थी औऱ आज भी इस कविता के लिए वह प्रसिद्ध हैं इस कविता में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय पंजाब में जो भयावह घटना हुई थी उसका वर्णन किया गया है यह जो उस समय की पीड़ादेयक घटना हुई थी उसका अन्यन्त दुखद वर्णन किया गया है यह कविता भारत औऱ पाकिस्तान दोनों ही देशों में सराही गयी.

अपनी प्रसिद्ध कविता में गुस्से और दर्द का किया वर्णन

अमृता प्रीतम जी भारत औऱ पाकिस्तान की बॉर्डर पर दोनों ही तरफ से काफी प्यार मिला.
अमृता जी अपने 6 दशकों के यात्रा में 100 से भी ज्यादा कविताओं की किताबें लिखी, निबन्ध,जीवनी,पंजाबी फोक गीत औऱ आत्मकथाएं जैसे रचना भी की. उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं को अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में भी भाषांतरित किया गया है. अमृता जी का एक नॉवेलिस्ट होने के तौर पे उनका सराहनीय काम पिंजर(1950) में हमे दिखाई देता है, इसी नावेल पे 2003 में एक अवार्ड इनिंग फ़िल्म पिंजर बनाई गई है.

1947 में जब ब्रिटिश शासित भारत का विभाजन आजाद भारत के रूप में हुआ इसी विभाजन के बाद वह भारत के लाहौर में आई. उनकी जो प्रसिद्धि रही थी उस पर इनका असर नही पड़ा. यहाँ तक कि जब विभाजन हुआ तो इसके बाद भी पाकिस्तान की जनता उनकी कविताओं को उतना ही पसन्द करते थे जितना कि भारत पाकिस्तान के विभाजन के पूर्व करते थे.
यहाँ तक उनकी प्रतिद्वंदी मोहन सिंह औऱ शिव कुमार बतालवी के होने पर भी उनकी जो प्रसिद्धि और लोकप्रियता थी वह भारत- पाकिस्तान दोनों ही देश मे कम नहीं हुई.

 

amrita pritam great punjabi writer
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2005 में निधन हुआ-

अमृता प्रीतम जी 86 वर्ष की उम्र में लम्बी बीमारी के बाद साल 2005 में 31 अक्टूबर को प्राण त्यागे. निधन के समय वह दक्षिण दिल्ली के हौज खास क्षेत्र में निवासरत थीं. भले आज वह हमें छोड़कर चली गईं हैं लेकिन आज भी उनकी कविताएं, कहानियां,नज्में संस्मरण हमेशा ही हमारे बीच मे रहेंगे.

एक युग का अंत-

अमृता प्रीतम जी जैसे महान साहित्यकार हर दिन नही मिलते हैं, उनका इस दुनिया से चले जाने का अर्थ है कि एक युग का अंत हो गया है और अब वह हमारी यादों में ही रह गयी हैं. इसी के साथ उनकी साहित्य हमेशा हमारे बीच रहेगा औऱ हमें मार्गदर्शन के लिए प्रेरित करता रहेगा।

        

सम्मान और पुरस्कार :

अमृता प्रीतम जी एक महान साहित्यकार थीं जिनको उनके अनेक महान रचनाओं के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से पुरस्कृत और सम्मानित किया गया,इसी कड़ी में उन्हें देश का सर्वोच्च पुरस्कार 1969 मेंपद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

उनके सम्मान में उन्हें पुरुस्कृत किये कुछ पुरस्कार निम्न है:-

1. 1956 में साहित्य अकादमी पुरस्कार

2. 1969 में पद्मश्री

3. 1973 में डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर

4. 1973 में डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर (जबलपुर युनिवर्सिटी

5. 1988 में बल्गारिया वैरोव पुरस्कार

6. 1982 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार

7. 1987 में डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर (विश्व भारती शांतिनिकेतन)

8. 1987 में फ़्रांस सरकार द्वारा सम्मान

9. 2004 में पद्म विभूषण

प्रमुख कृतियाँ :

1. उपन्यास :-

 पाँच बरस लंबी सड़क
पिंजर
अदालत
कोरे कागज़
उन्चास दिन
सागर
सीपियाँ
नागमणि
रंग का पत्ता
दिल्ली की गलियाँ
तेरहवां सूरज।

2. आत्मकथा :-

रसीदी टिकट।

3. कहानी संग्रह :-
कहानियाँ जो कहानियाँ नहीं हैं
कहानियों के आंगन में।

4. संस्मरण :-
कच्चा आँगन,
एक थी सारा।

5. कविता संग्रह :-
चुनी हुई कविताएँ।

उपन्यास :

1. डॉक्टर देव (1959)

(हिन्दी, गुजराती, मलयालम और अंग्रेज़ी में अनूदित)

2. पिंजर (1950)
(हिन्दी, उर्दू, गुजराती, मलयालम, मराठी, अंग्रेज़ी और सर्बोकरोट में अनूदित)।

3. आह्लणा (1952)
(हिन्दी, उर्दू और अंग्रेज़ी में अनूदित)।

4. आशू (1958)
हिन्दी और उर्दू में अनूदित।

5. इक सिनोही (1959)
हिन्दी और उर्दू में अनूदित।

6. बुलावा (1960)
हिन्दी और उर्दू में अनूदित।

7. बंद दरवाज़ा (1961)
हिन्दी, कन्नड़, सिंधी, मराठी और उर्दू में अनूदित।

8. रंग दा पत्ता (1963)
हिन्दी और उर्दू में अनूदित।

9. इक सी अनीता (1964)
हिन्दी, अंग्रेज़ी और उर्दू में अनूदित।

10. चक्क नम्बर छत्ती (1964)
हिन्दी, अंग्रेजी, सिंधी और उर्दू में अनूदित।

11. धरती सागर ते सीपियाँ (1965)
हिन्दी और उर्दू में अनूदित।

12. दिल्ली दियाँ गलियाँ (1968)
हिन्दी में अनूदित।

13. एकते एरियल (1969)
हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनूदित।

14. जलावतन (1970)
हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनूदित।

15. यात्री (1971)
हिन्दी, कन्नड़, अंग्रेज़ी बांग्ला और सर्बोकरोट में अनूदित।

16. जेबकतरे (1971),
हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी, मलयालम और कन्नड़ में अनूदित।

17. अग दा बूटा (1972)
हिन्दी, कन्नड़ और अंग्रेज़ी में अनूदित।

18. पक्की हवेली (1972)
हिन्दी में अनूदित।

19. अग दी लकीर (1974)
हिन्दी में अनूदित।

20. कच्ची सड़क (1975)
हिन्दी में अनूदित।

21. कोई नहीं जानदाँ (1975)
हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनूदित।

22. उनहाँ दी कहानी (1976)
हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनूदित।

23. इह सच है (1977)
हिन्दी, बुल्गारियन और अंग्रेज़ी में अनूदित।

24. दूसरी मंज़िल (1977)
हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनूदित।

25. तेहरवाँ सूरज (1978)
हिन्दी, उर्दू और अंग्रेज़ी में अनूदित।

26. उनींजा दिन (1979)
हिन्दी और अंग्रेज़ी में अनूदित।

27. कोरे कागज़ (1982)
हिन्दी में अनूदित।

28. हरदत्त दा ज़िंदगीनामा (1982)
हिन्दी और अंग्रेज़ी

Author: AdminG